House wise Dance Music On Sports In Fourth Saturday सबल भारत गतिविधि: चतुर्थ शनिवार – खेल थीम पर सदनवार नृत्य और संगीत (लोककला) प्रतियोगिता

House wise Dance Music On Sports In Fourth Saturday

गतिविधि विवरण

  • गतिविधि: नृत्य/संगीत (लोककला)
  • प्रकार: सदन/हाउसवार (Inter-House Competition)
  • अंक: 15
  • उपविषय (Theme): खेल (Sports & Physical Wellness)

प्रस्तावना: नृत्य, संगीत और ‘खेल’ का अद्भुत संगम

सीसीएलई (Continuous and Comprehensive Learning and Evaluation) के अंतर्गत ‘सबल भारत’ थीम के तहत प्रत्येक माह के चतुर्थ शनिवार को आयोजित होने वाली बाल सभा में नृत्य और संगीत (लोककला) गतिविधि का विशेष महत्व है। इस बार की गतिविधि का उपविषय (Theme) ‘खेल’ (Sports) रखा गया है।

खेल केवल मैदान तक सीमित नहीं हैं; यह उत्साह, टीम वर्क, अनुशासन और ऊर्जा का प्रतीक है। इस गतिविधि का मुख्य उद्देश्य छात्रों को भारतीय लोककला (नृत्य और संगीत) के माध्यम से खेल भावना (Sportsmanship) और शारीरिक फिटनेस के महत्व को रचनात्मक ढंग से प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करना है। कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्र विभिन्न लोक नृत्यों और लोकगीतों के माध्यम से पारंपरिक और आधुनिक खेलों के प्रति जागरूकता फैलाएंगे।


गतिविधि का उद्देश्य और महत्व

  1. खेल भावना का कलात्मक प्रदर्शन: छात्र लोक नृत्यों (जैसे- गरबा, भांगड़ा, या आदिवासी नृत्य) और क्षेत्रीय संगीत का उपयोग करके खेल के महत्व, जीत-हार के प्रति समान भाव और टीम वर्क की कहानी बयां करेंगे。
  2. सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव: भारत की समृद्ध लोककलाओं (Folk Arts) का संरक्षण और संवर्धन।
  3. स्वास्थ्य और ऊर्जा का संचार: लोक नृत्य स्वयं में एक बेहतरीन व्यायाम है। इसे ‘खेल’ थीम के साथ जोड़ने से शारीरिक गतिविधि और मानसिक कल्याण को बढ़ावा मिलता है।
  4. मंच का भय दूर करना: छात्रों में आत्मविश्वास और मंच पर प्रदर्शन (Stage Presence) करने की क्षमता विकसित करना।

प्रस्तुति के लिए कुछ रचनात्मक आइडिया (Creative Ideas for Houses)

विभिन्न सदन (Houses) अपनी प्रस्तुति को आकर्षक बनाने के लिए निम्नलिखित विचारों का प्रयोग कर सकते हैं:

  • पारंपरिक खेलों पर आधारित लोकनृत्य: कबड्डी, खो-खो, या गिल्ली-डंडा जैसे पारंपरिक खेलों की भाव-भंगिमाओं (Movements) को लोकनृत्य (जैसे मालवा का मटकी या बुंदेलखंड का राई) के साथ मिश्रित करके कोरियोग्राफी करना।
  • विजय गीत या एंथम (Folk Music): लोक वाद्य यंत्रों (ढोलक, मंजीरा, बाँसुरी) का उपयोग करके खिलाड़ियों के संघर्ष, मेहनत और उनकी जीत का जश्न मनाने वाले लोकगीत या भजन प्रस्तुत करना।
  • Props (सहायक सामग्री) का उपयोग: अपनी प्रस्तुति में खेल के उपकरणों (जैसे- हॉकी स्टिक, बैडमिंटन रैकेट, फुटबॉल या रस्सी) का उपयोग पारंपरिक लोक परिधानों के साथ रचनात्मक रूप से करना।
  • शारीरिक सौष्ठव का प्रदर्शन: मलखंब या योग के आसनों को शास्त्रीय या क्षेत्रीय लोक संगीत की ताल (Rhythm) पर प्रस्तुत करना।

आयोजन प्रक्रिया (How to Organize)

  1. विषय की घोषणा: गतिविधि से कम से कम एक सप्ताह पूर्व सभी सदनों (रेड, ब्लू, ग्रीन, येलो आदि) को ‘खेल’ थीम की जानकारी दे दी जाए।
  2. समय सीमा: प्रत्येक हाउस को अपनी प्रस्तुति (नृत्य या संगीत) के लिए अधिकतम 5 से 7 मिनट का समय दिया जाए।
  3. प्रतिभागियों की संख्या: यह एक सामूहिक (Group) गतिविधि होगी। प्रत्येक हाउस से न्यूनतम 5 और अधिकतम 10-12 छात्र भाग ले सकते हैं।
  4. वैकल्पिक व्यवस्था: विद्यालय स्तर पर लोक नृत्य विशेषज्ञों या शिक्षकों द्वारा एक छोटी कार्यशाला आयोजित की जा सकती है ताकि छात्रों को लय और ताल की समझ मिल सके।

मूल्यांकन प्रक्रिया (Evaluation Criteria – 15 अंक)

निर्णायकों (Judges) द्वारा प्रत्येक सदन का मूल्यांकन निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ मापदंडों के आधार पर किया जाएगा:

1. थीम (‘खेल’) की प्रासंगिकता और कोरियोग्राफी (5 अंक):

  • नृत्य/संगीत में ‘खेल’ के विषय को कितनी रचनात्मकता (Originality) के साथ पिरोया गया है?
  • क्या नृत्य की चालों (Movements) में खेल की ऊर्जा और उत्साह दिखाई दे रहा है?
  • कलाकारों के बीच आपसी समन्वय (Synchronization) कैसा है?

2. पारंपरिकता, वेशभूषा और प्रॉप्स (4 अंक):

  • क्या प्रदर्शन मूल लोककला (Folk Art) के स्वरूप का सम्मान करता है?
  • प्रस्तुति में उपयोग की गई पारंपरिक वेशभूषा और खेल से जुड़े प्रॉप्स (Props) की प्रामाणिकता और रचनात्मकता।

3. ताल, लय और संगीत (3 अंक):

  • क्या नर्तकों के कदम (Footwork) संगीत की ताल (Rhythm) के साथ सटीक रूप से मेल खा रहे हैं?
  • यदि गायन है, तो सुर, ताल और वाद्य यंत्रों का समन्वय कैसा है?

4. मंच उपस्थिति, हाव-भाव और आत्मविश्वास (2 अंक):

  • प्रदर्शन के दौरान कलाकारों के चेहरे के भाव (Expressions), ऊर्जा (Energy) और आत्मविश्वास (Confidence) का स्तर।
  • क्या उन्होंने दर्शकों के साथ एक जीवंत जुड़ाव (Audience Connect) बनाया?

5. सामूहिक प्रयास (Team Work) (1 अंक):

  • हाउस के सदस्यों ने एक टीम (Team Spirit) के रूप में कितनी अच्छी तरह काम किया है, जो कि खेल का मूल मंत्र भी है।

निष्कर्ष (Conclusion):

यह ‘नृत्य/संगीत (लोककला)’ गतिविधि केवल एक प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह हमारे छात्रों को यह सिखाने का एक जरिया है कि ‘खेल’ केवल जीतने के लिए नहीं खेले जाते, बल्कि वे जीवन में अनुशासन, खुशी और एक लय (Rhythm) लाते हैं। आइए, इस बाल सभा में लोककला के रंगों से खेल की भावना को जीवंत करें!

इस ‘खेल’ (Sports) थीम पर आधारित नृत्य/संगीत (लोककला) गतिविधि के लिए कुछ सटीक और व्यावहारिक उदाहरण (Examples) नीचे दिए गए हैं। छात्र अपने सदन (House) की प्रस्तुति तैयार करने के लिए इन आइडियाज का उपयोग कर सकते हैं:

उदाहरण 1: ‘सितोलिया’ (पिठ्ठू) और मालवी ‘मटकी’ नृत्य का संगम

  • खेल: सितोलिया (पारंपरिक खेल)
  • लोककला: मालवा का ‘मटकी’ नृत्य
  • प्रस्तुति का तरीका: छात्राएं पारंपरिक मालवी वेशभूषा पहनकर मटकी नृत्य की ताल और कदमों (footwork) का उपयोग करते हुए सितोलिया खेलने का दृश्य प्रस्तुत कर सकती हैं। ढोलक की एक विशेष बीट पर गेंद (Ball) मारना और पत्थर जमाना कोरियोग्राफ किया जा सकता है। यह खेल की चंचलता और नृत्य की ग्रेस (Grace) का बेहतरीन उदाहरण होगा।

उदाहरण 2: ‘मलखंब’ और वीर रस का बुंदेलखंडी ‘आल्हा’ गायन

  • खेल: मलखंब (मध्य प्रदेश का राजकीय खेल)
  • लोककला: आल्हा गायन (बुंदेलखंड की लोक गायन शैली)
  • प्रस्तुति का तरीका: मंच पर कुछ छात्र मलखंब (या योगासनों) के माध्यम से अपनी शारीरिक शक्ति और संतुलन का प्रदर्शन कर सकते हैं, जबकि उनके हाउस के गायक छात्र पृष्ठभूमि (background) में ढोलक और मंजीरे के साथ ‘आल्हा’ की तर्ज पर एक लोकगीत गाएं। इस गीत के बोल खिलाड़ियों की ताकत, पसीने और मेहनत का वर्णन कर सकते हैं।

उदाहरण 3: ‘कबड्डी’ का मैदान और ‘राई’ नृत्य की तेज़ बीट्स

  • खेल: कबड्डी
  • लोककला: राई नृत्य (बुंदेलखंड)
  • प्रस्तुति का तरीका: कबड्डी खेलते समय रेडर (Raider) और डिफेंडर्स की हरकतों (Movements) को राई नृत्य के तीव्र और ऊर्जावान स्टेप्स के साथ सिंक (Sync) किया जा सकता है। “कबड्डी-कबड्डी” बोलने की लय को मृदंग या ढोल की थाप के साथ जोड़कर एक शानदार डांस ड्रामा (Dance Drama) तैयार किया जा सकता है।

उदाहरण 4: ‘कुश्ती’ (दंगल) और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की जुगलबंदी

  • खेल: कुश्ती
  • लोककला: केवल पारंपरिक वाद्य यंत्रों का वादन (Instrumental Music)
  • प्रस्तुति का तरीका: इस प्रस्तुति में शब्दों का प्रयोग न करते हुए केवल ढोल, ताशे और नगाड़ों की तेज़ थाप पर दो छात्र कुश्ती के दांव-पेंच को एक लोकनृत्य के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं। संगीत की गति (Tempo) खेल की गति के साथ-साथ बढ़ेगी, जो शारीरिक सौष्ठव और खेल के जोश को मंच पर जीवंत कर देगी।

उदाहरण 5: खेल नायकों पर आधारित ‘विजय गान’ (Folk Song)

  • खेल थीम: खिलाड़ियों का संघर्ष और जीत
  • लोककला: बघेली या निमाड़ी लोकगीत
  • प्रस्तुति का तरीका: यदि कोई हाउस गायन (Music) पर फोकस करना चाहता है, तो वे एक पारंपरिक लोकगीत की धुन तैयार कर सकते हैं, जिसके बोल (Lyrics) मेजर ध्यानचंद, मैरी कॉम, या नीरज चोपड़ा जैसे खिलाड़ियों के संघर्ष, पसीने और मेडल जीतने की कहानी बताते हों। इसमें बीच-बीच में लोक वाद्य यंत्रों का बेहतरीन इस्तेमाल किया जा सकता है।

💡 शिक्षक/प्राचार्य के लिए टिप: आप छात्रों से कह सकते हैं कि वे अपने गाँव या क्षेत्र में खेले जाने वाले किसी स्थानीय खेल (Local Sport) को चुनें और उसे अपने ही क्षेत्र के किसी प्रसिद्ध लोकगीत या नृत्य के साथ जोड़कर प्रस्तुत करें। इससे प्रस्तुति अधिक प्रामाणिक (Authentic) लगेगी!

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