Principal Teachers Responsibility to develop 21st Century Skills : CCLE के सफल क्रियान्वयन हेतु प्राचार्य/ शिक्षक की भूमिका और जवाबदारी

यह दिशानिर्देश Principal Teachers Responsibility to develop 21st Century Skills हित धारकों को सीसीएलई आधारित गतिविधियों (CCLE Based Activities) पर आधारित शिक्षा की प्रक्रिया और उसके क्रियान्वयन की समझ विकसित करने के लिए दिए गए हैं । CCLE आधारित गतिविधियों के सरल और सुगम संचालन के लिए विभिन्न Stackholders  की भूमिका, जवाबदारी को सुनिश्चित करने के प्रयासों के विषय में जानकारी प्रदान करेग। विभिन्न स्टेकहोल्डर्स के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जाते हैं :-

Table of Contents

CCLE के सफल क्रियान्वयन हेतु प्राचार्य/ प्रधानाध्यापक की भूमिका और जवाबदारी

CCLE कार्यक्रम के क्रियान्वयन में स्कूल के प्रमुख की महत्वपूर्ण भूमिका होती है । स्कूल के प्राचार्य CCLE कार्यक्रम की राज्य और जिला नीति (State and District Policy) उनके स्कूल में कैसे लागू की जा सकती है, इसको आकार देते हैं । वे योजना का नेतृत्व करते हैं, कार्यान्वयन को प्रोत्साहित करते हैं और क्रियान्वयन और संचालन में अपनी टीम को फॉलो करते हैं ।

प्राचार्य के लिए आवश्यक है कि वह :

  • एक स्पष्ट दृष्टिकोण रखें और वार्षिक लक्ष्य विकसित करें और अपने स्कूलों में CCLE आधारित गतिविधियों के क्रियान्वयन के लिए योजना बनाएं ।
  • शिक्षकों और बच्चों के माता-पिता को CCLE की अवधारणा के बारे में उनकी तत्परता और स्पष्टता के लिए तैयार कर अनुकूल रखें ।
  • शिक्षकों के साथ लचीला रहे और उन्हें CCLE आधारित गतिविधियों की क्षमता विकास में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें ।
  • उनके स्कूलों में CCLE आधारित गतिविधियों की कक्षाओं के सर्वोत्तम अभ्यास को स्वीकार करें और उनकी सराहना करें ।
  • शिक्षकों के बेहतर Follow up और Handholding के लिए मासिक बैठक आयोजित करें ।
  • छात्रों और शिक्षकों की मदद से सामुदायिक संसाधनों का पता लगाएं और उन्हें जुटाने का प्रयास करें ।

शिक्षक की भूमिका और जवाबदारी

एक सफल CCLE आधारित गतिविधियों की कक्षा, विषय शिक्षण के साथ कला को एकीकृत कर शिक्षा के प्रयासों पर अत्यधिक निर्भर होती है, इसीलिए CCLE आधारित गतिविधियों की कक्षा में एक  शिक्षक से एक संरक्षक, मार्गदर्शक और सहजकर्ता की भूमिका निभानी की अपेक्षा की जाती है, जो सीखने की क्षमता को प्रकट करता है । शिक्षक को

  • उसकी कक्षा के लिए एक स्पष्ट दृष्टि और लक्ष्य रखने होंगे, जो स्कूल, राज्य और जिले के साथ एकीकृत हों ।  
  • इसे लागू करने के लिए प्रधानाध्यापक के साथ विचार-विमर्श और सहयोग करें ।
  • टीम के साथ साथ व्यक्तिगत रूप से अधिक से अधिक गतिविधियों को डिजाइन करें ।
  • निरंतर विकास के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम में भाग लेकर निरंतर प्रक्रिया को बढ़ाते रहीं ।
  • त्योहारों सभाओं बालसभा और विशेष दिनों के लिए वार्षिक स्कूल कैलेंडर का पालन करें, जिससे CCLE आधारित गतिविधियों में शिक्षा शास्त्र के लिए, उसका रचनात्मक रूप से उपयोग किया जा सकता है, जैसे बाल सभा का उपयोग, सामाजिक विज्ञान में चुनाव प्रक्रिया समझाने के लिए किया जा सकता है ।
  • विद्यार्थियों की सहायता से सामुदायिक संसाधनों को चिन्हित करने और जुटाने में भाग ले ।

21 वी शताब्दी के कौशलों पर आधारित गतिविधियों की योजना बनाना

एक बार जब शिक्षक 21 वी शताब्दी के कौशलों पर आधारित गतिविधियां का उपयोग करने का निर्णय कर लेता है तो उसे उसकी योजना पर भी काम करना होता है । 21वीं सदी के कौशलों पर आधारित गतिविधियों का उपयोग करते समय गतिविधि आधारित तकनीक को विषय वस्तु से जोड़ने के तरीकों को पहचानना शिक्षक के लिए आवश्यक है । निम्नलिखित कौशल शिक्षक की इस यात्रा को सही मार्ग पर बनाए रखेंगे ।

  • उसकी पूर्व योजना,
  • विषय वस्तु के साथ उसका परिचय,
  • बच्चों की प्रतिक्रिया और निर्देशित करने और उनकी समीक्षा करने के प्रति उसकी सतर्कता

21 वी शताब्दी के कौशलों पर आधारित गतिविधियों हेतु आवश्यक संसाधन के प्रकार

भौतिक संसाधन

सभी तरह की गतिविधियों के लिए वस्तुओं, यंत्रों, संसाधनों के चयन की योजना बनाते समय इन 5 चीजों को ध्यान में रखा जाना चाहिए :

किफायती

पर्यावरण अनुकूल

बार-बार प्रयोग में आनेवाला

अभिनव, नवीन हो

स्थानीय स्तर पर जिसकी सरल उपलब्धता हो

संसाधनों के कुछ उदाहरण

पुराने पत्र पत्रिकाएं, समाचार पत्र-पत्रिकाएं, पुरानी कॉपियों के पन्ने, उपयोग हो चुके कागज के लिफाफे, पैकेजिंग सामग्री आदि

पुरानी खराब हो चुके कपड़े, पुराने मोजे, दुपट्टा, साड़ियां आदि

गीली मिट्टी, उपयोग हो चुके सूती और रेशमी धागे, मनके, रंग-बिरंगे पुरानी चूड़ियां, बिंदी आदि

कई तरह की पुरानी चिमटियाँ, पुराने बटन आदि

नारियल का खोल, पिस्ता के बीज का खोल, अखरोट, बदाम का खोल आदि

कंकड़, छाल, पंख, रेत, बांस और झाड़ू, गत्ते का पुराना खोखा, पुराने निमंत्रण पत्र, गुब्बारे पेंट, गेंद, स्पंज आदि ।

कक्षा प्रबंधन

कक्षा वह स्थान है जिसका यदि उचित रूप से उपयोग और प्रबंधन किया जाए तो सीखने का उर्वर स्थान बन जाता है । प्रभावी कक्षा प्रबंधन के लिए नीचे कुछ उदाहरण दिए जा रहे हैं :

  • एक 21वीं सदी के कौशलों पर आधारित गतिविधियों के प्रभावी अनुपालन के लिए कक्षा में बच्चों के बैठने की व्यवस्था और बच्चों और शिक्षकों के आने-जाने गतिविधियों होनी चाहिए । साथ में यह भी अनुशंसा की जाती है की गतिविधियों के लिए अधिक स्थान मिल सके इसके लिए बैठने की परंपरागत प्रणाली जैसा पक्षी और कॉलम की जगह बच्चों को गोलाकार , अर्ध गोलाकार में बैठाया जाए ।
  • बच्चों के साथ बातचीत करते समय और गतिविधियों के लिए शिक्षकों अध्यापकों को बच्चों तक पहुंचने के लिए कक्षा में जगह होनी चाहिए ।  इससे शिक्षकों कक्षा में प्रत्येक बच्चे तक पहुंचने में आसानी होगी ।
  • बेहतर परिणाम के लिए बच्चे का समय बदलते रहें जिससे बच्चे आपस में एक दूसरे को ज्यादा और बेहतर तरीके से समझ सके ।  साथ ही वह एक दूसरे की ताकत और क्षमता से भी परिचित हो सकें और विषय की बेहतर समझ के लिए सहयोगात्मक रूप से सीखे जिससे उनके सामाजिक कौशल में रहती हो ।
  • इंटरएक्टिव शिक्षा वातावरण बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ।
  • प्रत्येक कक्षा में प्रदर्शन के लिए स्थान सुनिश्चित होना चाहिए जहां बच्चों के काम को प्रदर्शित किया जा सके ।
  • ग्रेडिंग कार्नर बनाए जा सकते हैं जहां बच्चों को कहानियों की किताबें, कॉमिक्स, लोक कथाएं, दंत कथाएं आदि पढ़ने में आसानी हो ।
  • कक्षा में एक अभिनव, नवाचार प्रदर्शन करने वाला स्थान, क्षेत्र भी हो सकता है जिसका उपयोग नियमित होने वाली प्रस्तुतियों और प्रदर्शन के लिए किया जा सकता है ।

21 वी शताब्दी के प्रश्नों पर आधारित गतिविधियों के आर्टवर्क का प्रदर्शन

कक्षा में बच्चों के कला संबंधी काम को प्रदर्शित करने का स्थान सुनिश्चित होना चाहिए क्योंकि यह अधिगम में रुचि और उत्सुकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । यह बच्चों को स्वयं के और दूसरों के कार्यों का विश्लेषण और सराहना करने में भी मदद करता है । बेहतर प्रदर्शन के लिए कुछ सुझाव इस प्रकार हैं :

  • सभी बच्चों के मूल, बिना किसी सुधार के, आर्टवर्क का प्रदर्शन किया जाना चाहिए ।
  • प्रदर्शन के लिए कक्षा की दीवा,र बरामदे की दीवार आदि का उपयोग किया जा सकता है ।
  • प्रत्येक बच्चे के निर्माण की प्रक्रिया के लिए सराहना की जानी चाहिए, ना कि बनाई गई वस्तु के लिए ।
  • प्रदर्शन की समय अवधि निश्चित होनी चाहिए ।  प्रदर्शित कला का समय बदलते रहना चाहिए ।
  • काम के अलावा प्रदर्शन क्षेत्र में महान कलाकारों के काम को भी प्रदर्शित किया जाना चाहिए, जो बच्चों को एक कला विशेष की बारीकियों को समझने और अपनी खुद की सौन्दर्य की समझ को बेहतर कर सकें ।
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