Essay on SVEEP : Activity in School

Essay on SVEEP : Systematic Voters’ Education and Electoral Participation program अर्थात “व्यवस्थित मतदाताओं की शिक्षा और चुनावी भागीदारी कार्यक्रम “ जिसे SVEEP के नाम से जाना जाता है जो भारतीय चुनाव आयोग का प्रमुख कार्यक्रम है जो भारत में मतदाता शिक्षा, मतदाता जागरूकता और मतदाता साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए है। इसे 2009 से निर्वाचन आयोग ने प्रारम्भ किया है ताकि प्रत्येक भारतीय मतदाता देश के लोकतन्त्र को मजबूत बनाने मे अपना सहयोग दे । SVEEP के अंतर्गत, जनता को मतदाता शिक्षा के बारे में जागरूक किया जाता है , वोटर आईडी कार्ड की प्रमाणित प्रति को बढ़ावा दिया जाना  और मतदान केंद्रों के लिए सुविधाजनक पहुंच सुनिश्चित की जाती है । इसके साथ ही, विभिन्न सामाजिक मीडिया प्लेटफार्म्स का उपयोग भी किया जाता है  ताकि जनता तक संदेश पहुंचाया जा सके। यह योजना जनहित में एक महत्वपूर्ण कदम है जो चुनावी प्रक्रिया को सुचारु और निष्पक्ष बनाने का उद्देश्य रखता है।

SVEEP के अंतर्गत विभिन्न संस्थाओं और एनजीओ के द्वारा मतदाता जागरूकता हेतु अनेक कार्यक्रम चलाये जाते हैं । स्कूल और कॉलेज मे चलायी जाने वाली विभिन्न कार्यक्रम निम्नानुसार हैं

  1. निबंध प्रतियोगिता
  2. वाद विवाद प्रतियोगिता
  3. रंगोली प्रतियोगिता
  4. रेली एवं पोस्टर प्रतियोगिता
  5. नुक्कड़ नाटक
  6. प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता SVEEP Quiz

इस बार यहाँ पर निबंध प्रतियोगिता हेतु Essay on SVEEP दिया जा रहा है । इसे आप प्रयोग कर सकते हैं :

Table of Contents

Essay on SVEEP in Hindi


Essay on SVEEP Topic 1 : कैसे करें 100% मतदान

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र, सर्वाधिक प्राचीन सभ्यता, वसुधैव कुटुंबकम की भावना से ओतप्रोत, विश्व की तीसरी आर्थिक महाशक्ति की आशान्वित भावना के साथ एवं सर्वाधिक जनसंख्या वाले देश भारत के स्वर्णिम भविष्य के लिए प्रत्येक भारतीय नागरिक की मेहनत एवं देशभक्ति की शक्ति लिए देश के सबसे बड़े लोकतंत्र के पर्व “लोक सभा चुनाव 2024” में 100% भागीदारी के लिए प्रत्येक भारतीय मतदाता को अपने मत का इस्तेमाल करना अत्यंत आवश्यक  है।  इस बार 100%ˌ मतदान करने का लक्ष्य लिए हम सभी भारतीय आगे बढ़ रहे हैं।  इस लेख में हम बात करेंगे कि कैसे हम 100% मतदान कर सकते हैं।  इसलिए आप सभी भारतीय नागरिकों से अनुरोध है कि इस लेख को पूरा पढ़ें। 

विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र, सर्वाधिक प्राचीन सभ्यता, वसुधैव कुटुंबकम की भावना से ओतप्रोत, विश्व की तीसरी आर्थिक महाशक्ति की आशान्वित भावना के साथ एवं सर्वाधिक जनसंख्या वाले देश भारत के स्वर्णिम भविष्य के लिए प्रत्येक भारतीय नागरिक की मेहनत एवं देशभक्ति की शक्ति लिए देश के सबसे बड़े लोकतंत्र के पर्व “लोक सभा चुनाव 2024” में 100% भागीदारी के लिए प्रत्येक भारतीय मतदाता को अपने मत का इस्तेमाल करना अत्यंत आवश्यक  है।  इस बार 100%ˌ मतदान करने का लक्ष्य लिए हम सभी भारतीय आगे बढ़ रहे हैं।  इस लेख में हम बात करेंगे कि कैसे हम 100% मतदान कर सकते हैं।  इसलिए आप सभी भारतीय नागरिकों से अनुरोध है कि इस लेख को पूरा पढ़ें। 

100 प्रतिशत मतदान के लिए अपने आप से यह प्रश्न पूछें

  1. क्या आप भारतीय हैं ʔ
  2. क्या आपके दिल में देश के लिए कोई सकारात्मक भावना है ʔ
  3. क्या आप भारत को विकसित एवं संपन्न, सर्वशक्तिमान बनाने के लिए कृत संकल्पित हैं ʔ
  4. स्वयं के लिए तो सभी जीते हैं , क्या आपने सोचा है कि इस बार हम देश के लिए जीकर देखते हैं ʔ
  5. भारत ने आपको बहुत कुछ दिया है , क्या आप अब भारत को कुछ देना चाहते हैं ʔ
  6. क्या आप समझते हैं कि कोई भी देश एक एक व्यक्ति से बनता है ʔ
  7. क्या आप इस पंक्ति से सहमत हैं “Democracy means of the people, for the people and by the people” 
  8. क्या आप इस देश का नमक खाते हैं ?
  9. क्या आपको अपने देश भारत पर गर्व है ?
  10. यदि आपने अभी साथ नहीं दिया तो मरने के बाद जन्नत/स्वर्ग में जाकर ईश्वर/अल्लाह को क्या जवाब देंगे ʔ

यदि आपके जवाब हाँ हैं तो आइये मतदान करने के लिए कृत संकल्पित हो लें। आप हम सब मिलकर यह संकल्प ले कि मैं भी अपने देश की सरकार चुनने में अपना वोट दुंगा । और यह कैसे होगा आइये क्रमबद्ध तरिके से जानते हैं।  

निर्वाचन आयोग के द्वारा जारी मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करें

  1. सबसे पहले अपना नाम मतदाता सूची में चेक् करें । इसके लिये नीचे दिये गये लिंक को क्लिक करें : Check Your Name in Electoral Roll
  2. यदि आपका नाम मतदाता सूची में है तो (मतदान करने हेतु षपथ लें) में दिये गये अनुदेष का पालन करें ।
  3. यदि नहीं है तो अपना नाम मतदाता सूची में जोडने के लिये
  4. अपने क्षेत्र के BLO से संपर्क कर अपना नाम मतदाता सूची में जुडवायें।
  5. अपने क्षेत्र के BLO को जानने के लिये इस लिंक को क्लिक करें – Know your BLO
  6. आप अपना नाम आनलाइन भी जुडवा सकते हैं, इसके लिये नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक कर फार्म 6 भर सकते हैं जिसमें आवष्यक दस्तावेज लगा कर आवेदन कर सकते हैं । Add Your Name in Electoral Roll
  7. यदि आप एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो गये हैं तो पूर्व स्थान की मतदाता सूची से अपना नाम निरसन करवाकर नये क्षेत्र में जुडवाना आवष्यक है । इसके लिये निम्न में से कोई एक स्थिति हो सकती है –
  8. यदि आपका स्थानांतरण एक ही विधानसभा क्षेत्र के अन्दर हुआ है अर्थात समान विधानसभा में एक क्षेत्र/गांव/मोहल्ला/षहर से दूसरे क्षेत्र/गांव/मोहल्ला/षहर में नाम परिवर्तित करने के लिये सिर्फ संषोधन करना आवष्यक है, जिसके लिये फाॅर्म 8 भरकर अपने नये क्षेत्र के BLO को प्रदान करें अथवा नीचे दी गई लिंक पर क्लिक कर फार्म 8 भरें । Link for Form 8
  9. यदि आपका स्थानांतरण एक विधानसभा से किसी दूसरी विधानसभा में हुआ है तो सबसे पहले आपका पूर्व विधानसभा से अपना नाम निरसन करवाना होगा जो निरसन फाॅर्म 7 से होगा । अतः आप फार्म 7 भरकर अपने पूर्व के BLO को दें जिसकी पावती नये क्षेत्र में नये तरीके से मतदाता सूची में नाम जुडवाने के लिये फाॅर्म 6 भरते समय आपको लगाना होगा ।

नाम निरसन करवाने के लिये फाॅर्म 7 का लिंक:- Link for Deletion

नये सिरे से नाम जोडने हेतु फाॅर्म 6 का लिंक:- Link for add Your Name

मतदान करने हेतु षपथ लें

किसी कार्य को पूरा करने के लिये प्रारम्भ में सकारात्मक भाव से षुरूआत की जाती है । आप सभी अपने परिवार के साथ अथवा किसी सार्वजनिक स्थान पर अपने क्षेत्र के बीएलओ की अगुवाई में एक षपथ लें कि आप आगामी निर्धारित तिथि को अपना वोट देने जरूर जायेंगे । इस हेतु निर्वाचन आयोग ने षपथ को कैसे लिये जाये निर्धारित किया है । यदि आप इस तरीके से षपथ लेते हैं तो आपको इसका एक प्रमाण पत्र भी प्राप्त होगा ।
नीचे दिये गये लिंक पर जाकर अपना नाम दर्ज करें एवं अपना प्रमाण पत्र डाउनलोड करें : Voters Pledge

मतदान की तिथि जानें


निर्वाचन आयोग ने आगामी लोकसभा चुनाव 2024 के लिये पूरे देष हेतु तिथियां निर्धारित कर दी हैं । आप पहले से ही यह तय कर लें कि आप इस दिनांक को अपने निर्धारित स्थान पर ही रहें । इस हेतु नीचे दी गई सूची से यह देख लें अथवा दी गई लिंक से जानें:- Know Voting Day

अपना मतदान केंद्र Booth जाने

दी गई निर्धारित तिथि को आप अपने मतदान केंद्र में जाकर अपना मत दे सकते हैं । इस हेतु जानना जरूरी है कि आपका मतदान केंद्र किस स्थान पर बनाया गया है । इस हेतु आप अपने इपिक कार्ड में दिये गये नम्बर से अपना मतदान केंद्र जानने के लिये नीचे दी गई लिंक को क्लिक करें । Know Your Voting Booth

Essay on SVEEP
Essay on SVEEP

100 प्रतिषत मतदान करने हेतु बीएलओ के लिये कार्ययोजना

मतदाता सूची को अ़द्यतन करने की जिम्मेदारी बीएलओ की होती है । अतः इस लक्ष्य को पाने के लिये आप उपरोक्त प्रक्रिया अपना सकते हैं ।

  1. अलग अलग क्षेत्रों में जाकर प्रत्येक मतदाता से षपथ दिलवायें कि वह आगामी मतदान दिवस पर अपना वोट अवष्य करेंगे । यह षपथ एक परिवार में, मोहल्ले में अथवा व्यक्तिषः भी हो सकती है । षपथ लेने का प्रमाण पत्र निर्वाचन आयोग की साइट से डाउनलोड करवाकर प्रत्येक मतदाता को अवष्य दें ।
  2. ऐसे बुजुर्गों की सूची बनवायें जो अपने बुढापे अथवा किसी बीमारी की वजह से मतदान केंद्र तक नही जा सकते उनके नाम पहले से तय कर लें और इस आषय की सूचना संबंधित अधिकारी को दें ताकि उनके डाक मतपत्र जारी किये जाकर उनसे उनके घर जाकर मत लिया जा सके ।
  3. एक ऐसी सूची बनायें जो मतदान के दिन अपने दर्ज क्षेत्र में उपस्थित ना हों जिसमें सम्भवतया नीचे दी गइ्र श्रेणियां हो सकती हैं:-
    3.1 दूसरे षहरों में पढने वाले बच्चे:- ऐसे काॅलेज के छात्र जो दूसरे ष्षहरों में रहकर पढाई कर रहे हैं , उनके परिवार से सम्पर्क कर यह जानने का प्रयास करें कि वह मतदान के दिन आयेंगे अथवा नहीं । यदि नहीं आयेंगे तो उनसे सम्पर्क स्थापित करें । और ऐसे मतदाता के लिये डाक मतपत्र जारी करवाकर उनसे डाक मतपत्र से वोट दिलवाये ।
    3.2 दूसरे षहरों में काम/नौकरी/धंधा करने वाले:-कई मतदाता ऐसे होते हैं जो अपने काम के सिलसिले में दूसरे ष्षहरों में चले जाते हैं, उनके परिवार से सम्पर्क करें और पता लगायें कि उक्त व्यक्ति आगामी मतदान दिवस को आयेंगे अथवा नहीं । ऐसे मतदाता यदि नहीं आयेंगे तो उनके लिये भी डाक मतपत्र जारी करवायें और इस प्रक्रिया का हिस्सा बनायें ।
    3.3 सषस्त्र बलः– कई मतदाता जो भारतीय सेना, सीमा सुरक्षा बल अथवा अन्य दूसरी पैरामिलिट्रि में कार्यरत रहते हैं, यदि उनके नाम भी मतदाता सूची में है तो उनके लिये भी आवष्यक कार्यवाही करें । इसके लिये सबसे पहले उनके परिवार से यह जानने का प्रयास करें कि वह व्यक्ति आगामी मतदान दिवस को उपस्थित रहेंगे अथवा नही । यदि नहीं रहेंगे तो सषस्त्र बल के लिये प्राॅक्सी मत की सुविधा का इस्तेमाल करें । अथवा उनके लिये भी नियमानुसार डाक मतपत्र जारी करवा कर उनका मत अवष्य लें ।
    3.4 बस/ट्रक/रेल परिवहन में कार्यरत:- यदि कोई मतदाता ऐसे है जो किसी परिवहन सेवा में लगा हुआ है तो ऐसे मतदाता भी मतदान के दिन उपस्थित नहीं हो पाते । ऐसे परिवारों से सम्पर्क कर पता लगायें कि वह व्यक्ति मतदान के लिये उपस्थित होगा या नहीं । यदि नहीं होगा तो ऐसे लोगों के लिये भी डाक मतपत्र जारी करवायें ताकि उनके मत का भी इस्तेमाल किया जा सके ।
    3.5 निर्वाचन कार्य में संलग्न कर्मचारी/अधिकारी:- यदि कोई मतदाता ऐसे है जो निर्वाचन अथवा अन्य किसी षासकीय कार्य में कार्यरत है और अपने मतदान स्थल पर नियत तिथि को उपलब्ध नहीं होगा ऐसे मतदाताओं को 100प्रतिषत इस कार्य हेतु डाक मतपत्र/निर्वाचन ड्यूटी सर्टिफिकेट जारी करवाने का आग्रह करें । यदि कोई षासकीय अधिकारी/कर्मचारी अपना मत नहीं देने का मन बनाता है तो उन्हें इसका बोध कराने हेतु अपने उच्चाधिकारी यथा जिला निर्वाचन अधिकारी को इसकी सूचना दें । सभी षासकीय कर्मचारियों /अधिकारियों को अपने कार्यस्थल पर ही निवास करने एवं मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करने हेतु समय समय पर प्रषासन प्रयास करता है ।

Essay on SVEEP Topic 2 : भारत निर्वाचन आयोग

भारत निर्वाचन आयोग एक स्‍वायत्त संवैधानिक प्राधिकरण है जो भारत में केंद्रीय एवं राज्‍य निर्वाचन प्रक्रियाओं का संचालन करने के लिए उत्तरदायी है। यह निकाय भारत में लोक सभा, राज्‍य सभा, राज्‍य विधान सभाओं, राष्‍ट्रपति एवं उप-राष्ट्रपति के पदों के लिए निर्वाचनों का संचालन करता है।

भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक निकाय

भारत, जो कि एक समाजवादी, धर्म निरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य है, और विश्‍व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है, 15 अगस्त 1947 को अस्तित्व में आया। उस समय से संविधान में स्थापित सिद्धान्तों, निर्वाचन विधियों और पद्धतियों के अनुसार नियमित अंतरालों पर स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वाचनों का आयोजन किया गया है। भारतीय संविधान ने संसद और प्रत्येक राज्य के विधान मंडल, साथ ही भारतीय राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों की पूरी प्रक्रिया के नियंत्रण, निर्देशन और प्रबंध का जिम्मेदारी भारतीय चुनाव आयोग को सौंपी है।

भारत निर्वाचन आयोग एक स्थायी संवैधानिक संगठन है। संविधान के अनुसार, इसकी स्थापना 25 जनवरी, 1950 को की गई थी। आयोग ने अपना स्वर्ण जयंती वर्ष 2001 में मनाया था। प्रारंभ में, आयोग में केवल एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त थे। वर्तमान में इसमें एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो निर्वाचन आयुक्त हैं। 16 अक्तूबर, 1989 को पहली बार दो अतिरिक्त आयुक्तों की नियुक्ति की गई थी, परंतु उनका कार्यकाल बहुत कम था जो 01 जनवरी, 1990 तक चला। तत्पश्चात, 01 अक्तूबर 1993 को दो अतिरिक्त निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की गई थी। तब से आयोग की बहु-सदस्यीय अवधारणा प्रचलित है, जिसमें निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाता है।

भारत निर्वाचन आयोग आयुक्तों की नियुक्ति एवं कार्यकाल

मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। उनका कार्यकाल 6 वर्ष होता है, या फिर 65 वर्ष की आयु, जो किसी भी पहले हो। उनका दर्जा भारत के उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के समान होता है और उन्हें समान वेतन और लाभ मिलते हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से केवल संसद द्वारा महाभियोग के माध्यम से ही हटाया जा सकता है।

भारत निर्वाचन आयोग ː संरचना

भारत निर्वाचन आयोग का नई दिल्ली में एक पृथक सचिवालय निर्वाचन सदन है जिसमें लगभग 300 अधिकारी/कर्मचारी पदानुक्रम रूप से कार्य करते हैं।

आयोग के कार्यों में सहयोग के लिए, सचिवालय के वरिष्ठतम अधिकारी के रूप में, दो या तीन उप निर्वाचन आयुक्त और महानिदेशक होते हैं। वे सामान्यतः देश की राष्ट्रीय सिविल सेवा से नियुक्त होते हैं और उनका चयन व कार्यकाल सहित उनकी नियुक्ति आयोग द्वारा की जाती है। इसी तरह से, निदेशक, प्रधान सचिव, सचिव, अवर सचिव और उप निदेशक, उप निर्वाचन आयुक्तों और महानिदेशकों को सहयोग देते हैं। आयोग में कार्य का क्षेत्र के आधार पर वितरण किया गया है। कार्य को डिविजनों, शाखाओं और अनुभागों में वितरित किया गया है; उल्लिखित इकाइयों में से प्रत्येक आखिरी इकाई अनुभाग अधिकारी के प्रभार में होती है। मुख्य प्रकार्यात्मक प्रभाग हैं: योजना, न्यायिक, प्रशासन, सुव्यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं निर्वाचक सहभागिता (स्वीप), सूचना प्रणालियां, मीडिया और सचिवालय समन्वयन। विभिन्न जोन के लिए उत्तरदायी पृथक-इकाइयों के मध्य प्रादेशिक कार्य का बँटवारा किया गया है जिसके लिए प्रबंधन की सुविधा हेतु देश के 35 संघटक राज्यों और संघ राज्य-क्षेत्रों का समूह बनाया गया है।

राज्य स्तर पर निर्वाचन कार्य का अधीक्षण राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा आयोग के समग्र अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण के अध्यधीन किया जाता है, और आयोग द्वारा इन मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति संबंधित राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित वरिष्ठ सिविल सेवकों में से की जाती है। अधिकतर राज्यों में वे पूर्णकालिक अधिकारी होते हैं और उनके पास सहायक स्टाफ की छोटी सी एक टीम होती है। जिला एवं निर्वाचन क्षेत्र स्तरों पर जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और रिटर्निंग अधिकारी होते हैं जिन्हें बड़ी संख्या में कनिष्ठ पदाधिकारियों का सहयोग मिलता है और वे निर्वाचन कार्य निष्‍पादित करते हैं।

भारत निर्वाचन आयोग ː बजट एवं व्यय 

निर्वाचन आयोग का अपना एक स्वतंत्र बजट होता है जिसे आयोग और संघ सरकार के वित्त मंत्रालय के परामर्श से अंतिम रूप दिया जाता है। वित्त मंत्रालय सामान्य रूप से आयोग के बजट की संस्तुतियों को स्वीकार कर लेता है। तथापि, निर्वाचनों के वास्तविक संचालन पर मुख्य व्यय, संघ राज्यों तथा संघ शासित क्षेत्रों की संबंधित घटक इकाइयों के बजट में शामिल किया जाता है। यदि निर्वाचन केवल लोक सभा के लिए ही करवाए जाते हैं तो व्यय समग्र रूप से संघ सरकार द्वारा वहन किया जाता है जबकि केवल राज्य विधान मंडल के लिए करवाए जाने वाले निर्वाचनों के लिए सारा व्यय संबंधित राज्य द्वारा वहन किया जाता है। संसदीय एवं राज्य विधान मंडल के निर्वाचन साथ-साथ होने की स्थिति में, केन्द्र एवं राज्य सरकार के बीच व्यय की समान रूप से हिस्सेदारी होती है। पूंजीगत खर्च , निर्वाचक नामावलियों को तैयार करने संबंधी व्यय तथा निर्वाचकों के पहचान पत्रों संबंधी योजना का व्यय भी समान रूप से बांट लिया जाता है।

कार्यकारी हस्तक्षेप से मुक्त 

अपने कार्यों के निष्‍पादन में निर्वाचन आयोग कार्यकारी हस्तक्षेप से पूर्णतया मुक्त है। आयोग ही निर्वाचनों के संचालन के लिए निर्वाचन कार्यक्रम के बारे में निर्णय लेता है चाहे वह साधारण निर्वाचन हो या उप निर्वाचन। निर्वाचन आयोग ही मतदान केन्द्रों की अवस्थिति, मतदान केन्द्रों के अनुसार मतदाताओं का आबंटन, मतगणना केन्द्रों की अवस्थिति, मतदान केन्द्रों एवं उसके आस-पास किए जाने वाले प्रबंधों और मतगणना केंद्रों तथा सभी संबंधित मामलों पर निर्णय लेता है।

राजनीतिक दल एवं भारत निर्वाचन आयोग

प्रत्येक राजनीतिक दल भारतीय कानून के तहत निर्वाचन आयोग के साथ पंजीकृत होते हैं। आयोग समय समय पर राजनीतिक दलों के संगठन संबंधी निर्वाचन करवाने हेतु जोर देकर उनके कामकाज में आंतरिक दलीय लोकतंत्र सुनिश्चित करता है। निर्वाचन आयोग के साथ इस प्रकार पंजीकृत राजनैतिक दलों को निर्वाचन आयोग, अपने द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार, साधारण निर्वाचनों में राजनैतिक दलों के मतदान के प्रदर्शन के आधार पर राज्यीय एवं राष्‍ट्रीय स्तर की मान्यता प्रदान करता है। आयोग, अपने अर्ध-न्यायिक अधिकार क्षेत्र के रूप में, ऐसे मान्यता प्राप्त दलों से अलग हुए दलों के बीच के विवादों का भी निपटान भी करता है।

निर्वाचन आयोग, राजनीतिक दलों की सहमति से तैयार की गई आदर्श आचार संहिता का उनके द्वारा कड़ाई से अनुपालन करवाकर निर्वाचन मैदान में राजनीतिक दलों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करता है।

निर्वाचन आयोग राजनीतिक दलों के साथ आवधिक रूप से निर्वाचनों के संचालन संबंधी मामलों एवं आदर्श आचार संहिता के अनुपालन और आयोग द्वारा निर्वाचन संबंधी मामलों पर प्रस्तावित नए उपायों को लागू करने पर विचार विमर्श भी करता है।

परामर्शी अधिकार क्षेत्र एवं अर्ध-न्यायिक प्रकार्य

संविधान के अधीन आयोग के पास संसद एवं राज्य विधान मंडलों के चयनित सदस्यों की निर्वाचन पश्‍चात निरर्हता के मामले में परामर्शी अधिकार भी पात्र हैं। इसके अतिरिक्त, निर्वाचनों में भ्रष्‍ट आचरण के लिए दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के मामले, जो कि उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं, भी आयोग की राय जानने के लिए कि क्या ऐसे लोगों को निर्रहित कर दिया जाए और, यदि हां, तो कितने समय के लिए, संबंधी मामले आयोग को सन्दर्भित किए जाते हैं। ऐसे सभी मामलों में आयोग की राय राष्‍ट्रपति या राज्यपाल, यथामामला हो  जिन्हें ऐसी राय प्रस्तुत की जाती है, पर बाध्यकारी होते हैं।

आयोग के पास ऐसे अभ्यर्थी, जो विधि द्वारा निर्धारित समय और रीति से अपने निर्वाचन व्यय के लेखे दाखिल करने में असफल हो जाते हैं, को अपात्र करने का अधिकार है। आयोग के पास विधि के अधीन अन्य निर्रहता तथा साथ ही ऐसी निर्रहता की अवधि को समाप्त करने या कम करने का अधिकार भी है।

भारत निर्वाचन आयोग ː न्यायिक समीक्षा 

आयोग के निर्णयों को भारत के उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में उचित याचिका द्वारा चुनौती दी जा सकती है। लंबे समय से चली आ रही परिपाटी और अनेक न्यायिक घोषणाओं के द्वारा, यदि एक बार निर्वाचनों की वास्तविक प्रक्रिया शुरू हो जाती है तो न्यायपालिका मतदान के वास्तविक संचालन में हस्तक्षेप नहीं करती है। एक बार मतदान समाप्त हो जाने एवं परिणाम घोषित हो जाने पर, आयोग किसी परिणाम का पुनरीक्षण स्वयं नहीं कर सकता है। संसदीय एवं राज्य विधान मण्डलों के निर्वाचनों के संबंध में इसका पुनरीक्षण केवल निर्वाचन याचिका की प्रक्रिया के माध्यम से किया जा सकता है जो कि उच्च न्यायालय के समक्ष रखी जाती है। राष्‍ट्रपतीय और उप राष्‍ट्रपतीय कार्यालयों के निर्वाचनों के संबंध में, ऐसी याचिका केवल उच्चतम न्यायालय के समक्ष ही दायर की जा सकती है।

मीडिया नीति

मीडिया के संबंध में भारत निर्वाचन आयोग की व्यापक नीति है। यह निर्वाचन अवधि एवं अन्य अवसरों पर लघु अंतरालों पर प्रिंट एवं इलेक्‍ट्रॉनिक मास मीडिया के लिए नियमित ब्रीफिंग आयोजित करता है। मीडिया के प्रतिनिधियों को मतदान एवं मतगणना के वास्तविक संचालन पर रिपोर्ट बनाने के लिए सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। उन्हें आयोग द्वारा जारी प्राधिकार पत्रों के आधार पर मतदान केन्द्रों एवं गणना केन्द्रों में जाने की अनुमति दी जाती है। इसमें अंतर्राष्‍ट्रीय एवं राष्‍ट्रीय मीडिया दोनों के सदस्य शामिल होते हैं। आयोग सांख्यिकीय रिपोर्ट एवं अन्य दस्तावेज भी प्रकाशित करता है जो सार्वजनिक रूप में उपलब्ध होते हैं। आयोग का पुस्तकालय शैक्षिक जगत के सदस्यों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं अन्य कोई भी इच्छुक व्यक्ति जो इसमें रूचि रखता हो, के शोध एवं अध्ययन के लिए उपलब्ध है।

आयोग ने मतदाताओं की जागरूकता के लिए राज्य के स्वामित्व वाले मीडिया – दूरदर्शन एवं आकाशवाणी के सहयोग से बड़ा प्रचार अभियान चलाया है। प्रसार भारती कॉर्पोरेशन, जो राष्‍ट्रीय रेडियो एवं टेलीविजन नेटवर्क का प्रबंधन करती है, ने इस उद्देश्य के लिए अनेक नवीन एवं प्रभावकारी लघु क्लिप बनाई हैं।

मतदाता शिक्षा 

लोकतान्त्रिक एवं निर्वाचन प्रक्रियाओं में मतदाता सहभागिता किसी भी लोकतन्त्र की सफलता के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है और लोकतान्त्रिक निर्वाचनों का पूर्ण आधार यही है। इस तथ्य को पहचानते हुए, निर्वाचन आयोग ने वर्ष 2009 में निर्वाचन प्रबन्धन के अभिन्न अंग के रूप में मतदाता शिक्षा और निर्वाचन सहभागिता को औपचारिक रूप से अपनाया है।

अंतर्राष्‍ट्रीय सहयोग 

भारत, लोकतंत्र और निर्वाचन सहायता हेतु अंतर्राष्‍ट्रीय संस्‍थान (आईडीईए) स्‍टॉकहोम, स्‍वीडन का एक संस्‍थापक सदस्‍य है। अभी हाल ही में, आयोग ने निर्वाचन प्रबंधन एवं प्रशासन, निर्वाचक विधियां एवं सुधार के क्षेत्र में अपने अनुभव एवं विशेष जानकारी को साझा करने के लिए अंतर्राष्‍ट्रीय संबंधों को बढ़ाया है। विभिन्‍न देशों यथा रूस, श्रीलंका, नेपाल, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, बांग्‍लादेश, थाईलैण्‍ड, नाइजीरिया, नामीबिया, भूटान, आस्‍ट्रेलिया, संयुक्‍त राज्‍य अमेरिका और अफगानिस्‍तान इत्‍यादि के राष्‍ट्रीय निर्वाचन निकायों के निर्वाचन अधिकारी और अन्‍य शिष्‍टमंडल भारतीय निर्वाचन प्रक्रिया को बेहतर रूप से समझने के लिए आयोग का दौरा कर चुके हैं। आयोग ने संयुक्‍त राष्‍ट्र संघ और राष्‍ट्रमंडल सचिवालय के सहयोग से अन्‍य देशों के निर्वाचनों के लिए प्रेक्षकों और विशेषज्ञों को भी उपलब्‍ध कराया था। 

नई पहल 

आयोग ने पिछले कुछ समय में कई नई पहल की हैं। इनमें से कुछ उल्‍लेखनीय हैं – राजनैतिक दलों द्वारा रेडियो प्रसारण/दूरदर्शन प्रसारण के लिए राज्‍य के स्‍वामित्‍व वाली इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया के प्रयोग की योजना बनाना, राजनीति के अपराधीकरण पर रोक लगाना, निर्वाचक नामावलियों का कंम्‍यूटरीकरण, निर्वाचकों को पहचान-पत्र उपलब्‍ध करवाना, अभ्‍यर्थियों द्वारा लेखा-जोखा रखने  और उन्‍हें प्रस्तुत  करने की प्रक्रिया को सरल बनाना तथा आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से अनुपालन करने हेतु विविध उपाय करना, निर्वाचनों के दौरान अभ्‍यर्थियों को एक- समान अवसर उपलब्‍ध करवाना। 

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